फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को गोविंद द्वादशी कहा जाता है। इसे भीम द्वादशी और तिल द्वादशी भी कहा जाता है। इस दिन पूजा एवं व्रत करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा होती है। साथ ही कष्ट एवं रोगों का नाश होता है। इस दिन भगवान श्री विष्णु के मंत्र का जाप करना अत्यंत शुभ फलदायी होता है। इस व्रत से मानव जीवन में समस्त रोगों से मुक्ति मिलती है।

तो आइए, देवदर्शन के इस ब्लॉग में गोविन्द द्वादशी व्रत (govinda dwadashi 2022) कब है? गोविन्द द्वादशी व्रत का महत्व और शुभ मुहूर्त को विस्तार से जानें। 

शुभ मुहूर्त

वर्ष 2022 में गोविंद द्वादशी व्रत 15 मार्च मंगलवार 2022 को पड़ रहा है। गोविंद द्वादशी व्रत (भौम प्रदोष व्रत) का शुभ मुहूर्त 15 मार्च को प्रातः 6:25 से 16 मार्च प्रातः 4:20 तक है। 

गोविन्द द्वादशी व्रत का महत्व

गोविन्द द्वादशी का व्रत करने वाले के लिए दान, हवन, तर्पण, ब्राम्हणों को दान, यज्ञ आदि का बहुत ही महत्व है। मान्यता है कि इस दिन जो भी दान करता है वह साक्षात भगवान विष्णु की कृपा का पात्र बनता है। श्री गोविंद का स्वरूप शांत और आनंदमयी है। वे जगत का पालन करने वाले हैं और उसे अंतकाल में वैकुण्ठ धाम की प्राप्ति होती है। गोविन्द द्वादशी के दिन भगवान विष्णु का स्मरण करने से भक्तों के जीवन के समस्त संकटों का नाश होता है और सुख समृद्धि की प्राप्ति होती है। 

गोविन्द द्वादशी व्रत का पूजन विधि

  • गोविंद द्वादशी के दिन प्रातःकाल में स्नान आदि करने के बाद पूजा का संकल्प लें। 
  • इसके बाद भगवान श्री विष्णु की प्रतिमा स्थापित करें।
  • भगवान की प्रतिमा को पंचामृत से स्नान करवाएं। 
  • प्रतिमा को पोंछकर सुन्दर वस्त्र पहनाएं।
  • चंदन, चावल, तुलसी और पुष्प आदि भगवान विष्णु को अर्पित करें।
  • भगवान श्री विष्णु को दीप, गंध अर्पित करें और धूप-दीप दिखाएं। 
  • आरती करने के पश्चात भगवान को भोग लगाएं।
  • भगवान के भोग को प्रसाद रूप में को सभी में बांट दें। 
  • पूरे दिन उपवास रखने के बाद रात में कीर्तन करें।
  • अगले दिन अपने सामर्थ्य अनुसार ब्राह्मणों को भोजन करवाएं और दान-दक्षिणा इत्यादि भेंट करें। 

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