हिंदू धर्म में गुड़ी पड़वा पर्व (gudi padwa) का विशेष महत्व है। इसी दिन से हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्रि का आरंभ भी होता है। इस पर्व को पूरे भारत में हिंदू नवसंवत्सर के रुप में मनाया जाता है। मान्यता है के इसी दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि का निर्माण किया था। इस दिन भगवान विष्णु और ब्रह्मा की पूजा-अर्चना की जाती है। 

गुड़ी पड़वा पर्व को दक्षिण भारत में उगादी पर्व (Ugadi Festival) के रूप में मनाया जाता है। गुड़ी पड़वा के त्योहार को मराठी नूतन वर्ष (marathi new year) के नाम से भी जाना जाता है। गुड़ पड़वा का त्योहार महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और गोवा सहित पूरे दक्षिण भारत में धूमधाम से मनाया जाता है। इस पर्व को दक्षिण भारत में उगादी पर्व (Ugadi Festival) के रूप में मनाते हैं। 

इस साल गुड़ी पड़वा 02 अप्रैल 2022, को पड़ रहा है। तो आइए, देवदर्शन के इस ब्लॉग में गुड़ी पड़वा 2022 का महत्व और पूजा विधि को विस्तार से जानें। 

गुड़ी पड़वा 2022 तिथि और शुभ मुहूर्त

  • गुड़ी पड़वा की आरंभ-11:53 (1 अप्रैल 2022)
  • गुड़ी पड़वा की समाप्ति- 11:57 (2 अप्रैल 2022)

गुड़ी पड़वा का महत्व (importance of gudi padwa)

मान्यता है कि इस त्योहार को मनाने से बुराईयों का नाश हो जाता है और सुख समृद्धि का आगमन होता है। साथ ही यह भी कहा जाता है कि इसी दिन से धरती पर सतयुग की शुरुआत हुई थी। इसलिए इस दिन को बहुत पवित्र दिन माना गया है। यही कारण है कि इस दिन से ही हिन्दू धर्म में नए वर्ष की शुरुआत मानी जाती है। 

किसानों के लिए गुड़ी पड़वा का शुभ दिन वसंत ऋतु के आगमन और फसलों की कटाई को दर्शाता है। यह पर्व प्रकृति को बहुत करीब लेकर आता है 

गड़ी पड़वा की पौराणिक कथा

मान्यता के अनुसार जब शिवजी ने ब्रम्हा जी को श्राप दिया था कि कहीं भी उनकी पूजा नहीं की जायेगी, लेकिन इस दिन ब्रम्हाजी की पूजा का ही महत्व है। ऐसा इसलिए क्योंकि इस दिन ब्रम्हा जी ब्रह्माण्ड की रचना की थी। दूसरी मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु ने मत्स्य अवतार लिया था। 

इस दिन सम्राट विक्रमादित्य ने शकों पर विजय प्राप्त की थी। इस जीत की खुशी में उन्होंने विक्रम संवत की शुरुआत की थी।

ऐसे मनाएं गुड़ी पड़वा का त्योहार

  • इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करें।
  • इसके बाद आपने घर और मंदिर की साफ-सफाई करें।
  • फिर अपने घर को चटख रंगों से रंगोली बनाने और साथ ही घर को अच्छे व ताजा फूलों से सजाएं।
  • इसके बाद हाथ में गंध, अक्षत, फूल और जल लेकर भगवान ब्रम्हा के मंत्रों का उच्चारण करके पूजा प्रारंभ करें
  • पारम्परिक तौर पर मीठे नीम की पत्तियां प्रसाद के तौर पर खाकर इस त्योहार को मनाने की शुरुआत की जाती है।
  • इस दिन ब्राह्मणों को भोजन व दान पुण्य जरूर दें।

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