हिंदू धर्म में कई तरह के व्रत और उपवास किया जाता है। हर एक व्रत का अपना एक अलग महत्व होता है। लेकिन हर माह आने वाले एकादशी व्रत को सभी व्रतों में श्रेष्ठ माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन व्रत रखना यज्ञ, जप, दान आदि के बराबर होता है। 

आपको बता दें, एकादशी हर महीने में दो बार आती है। एक पूर्णिमा के बाद और दूसरी अमावस्या के बाद होती है। पूर्णिमा के बाद आने वाली एकादशी को कृष्ण पक्ष की एकादशी कहते है और वहीं अमावस्या के बाद आने वाली एकादशी को शुक्ल पक्ष की एकादशी कहा जाता है।

शास्त्रों के अनुसार माघ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को जया एकादशी (jaya ekadashi vrat) के नाम से जाना जाता है। इस दिन भक्त व्रत व विधि-विधान के साथ पूजा करते हैं तो उनके ऊपर सदैव मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है और साथ ही दुख दूर होती है। जया एकादशी (jaya ekadashi vrat) के दिन भगवान श्री हरि की पूजा का विधान होता है।

तो आइए  देवदर्शन के इस ब्लॉग में आज हम जया एकादशी व्रत (jaya ekadashi vrat) को विस्तार से जानें।

जया एकादशी व्रत 2022

हिंदू कैलेंडर के मुताबिक माघ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी 12 फरवरी, 2022 दिन शनिवार को पड़ रही है। 

जया एकादशी का शुभ मुहूर्त 

जया एकादशी तिथि का शुभ मुहूर्त 11 फरवरी 2022, दिन शुक्रवार को दोपहर 1 बजकर 52 मिनट के शुरू होकर अगले दिन 12 फरवरी 2022, दिन शनिवार को शाम 4 बजकर 27 मिनट तक रहेगा। इस दौरान आप अपनी पूजा को पूरे विधि-विधान के साथ कर सकते हैं।  

जया एकादशी पूजा विधि (jaya ekadashi pooja vidhi)

  • जया एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करें।
  • इसके बाद मंदिर की अच्छे से साफ-सफाई करें।
  • व्रत का संकल्प लें।
  • फिर भगवान विष्णु की प्रतिमा को गंगाजल से अभिषेक कराएं।
  • बाद में गंगाजल को पूरे घर में छिड़के।
  • अब भगवान की पूजा-अर्चना करें।
  • पूजा करते समय भगवान विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
  • अंत में भगवान को भोग लगाएं। भोग के रूप में मिष्ठान चढ़ाएं।
  • मान्यताओं के अनुसार जया एकादशी की रात भगवान विष्णु के भजन व मंत्रों का जाप करना चाहिए।  
  • अगली सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद भगवान की पूजा करें और फिर अपने व्रत का पारण करें।

जया एकादशी का महत्व

शास्त्रों के अनुसार जया एकादशी को बहुत ही पवित्र और शुभ माना गया है।

  • इस दिन भगवान श्री हरि की पूजा व व्रत रखने से जीवन में तरक्की व धन की वर्षा होती है।
  • इस दिन व्रत को विधि-विधान के साथ पूरा करने से सभी पापों का नाश होता है और साथ ही व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
  • जय एकादशी के दिन पवित्र नदी व शुद्ध जल में स्नान करने का विधान होता है।
  • यह भी कहां जाता है कि इस व्रत को रखने से ब्रह्म हत्या दोष से मुक्ति मिलती है।
  • इस दिन विधि-विधान के साथ भगवान श्री हरि की पूजा करने से व्यक्ति पिशाच योनि का भय नहीं रहता है।

जया एकादशी व्रत कथा (jaya ekadashi vrat katha)

पौराणिक कथा के अनुसार एक बार देवराज इंद्र की सभा में गंधर्व गीत गा रहे थे। लेकिन किसी कारण वंश से उनकी गीत की लय बिगड़ गई। यह देखकर इंद्र देव को अपना अपमान महसूस हुआ और इसे वह बहुत क्रोधित हो, जिसके कारण से इंद्र ने गंधर्व और उनकी पत्नी को पिशाच योनि का शाप दे दिया। इंद्र देव के शाप के कारण गंधर्व और उनकी पत्नी पिशाच योनि में कष्ट भोगने लगे। एक दिन अपने दुखों से परेशान होकर उन्होंने माघ शुक्ल एकादशी के दिन  ही कुछ नहीं खाया और रात को भी परेशानी व सर्दी के कारण सो नहीं पाएं। इन सब को देखते हुए भगवान श्री हरि ने उन्हें इंद्र के शाप में मुक्त कर दिया और फिर वह अपने वास्तविक स्वरूप में आकर स्वर्ग की और प्रस्थान किया।  

स्वर्ग पहुचते ही इंद्र देव ने भी उन्हे क्षमा कर दिया और फिर उन्हें जया एकादशी के व्रत के बारे में बताया। जो उसे अनजान में पूरा हो गया था, जिसके कारण से भगवान श्री हरि ने उन्हें उनके शाप से मुक्ति किया। तब से ही जया एकादशी के व्रत को किया जा रहा है। 

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