भारत त्योहारों का देश है। इनमें महाशिवरात्रि बड़े पर्वों में से एक है। हिन्दू धर्म में महाशिवरात्रि और मासिक शिवरात्रि (masik shivratri) का विशेष महत्व है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार, प्रत्येक महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है।

शिवभक्तों के लिए मासिक शिवरात्रि विशेष महत्व होता है। इस व्रत को करने से भगवान शिव की कृपा से भक्तों के बिगड़े काम भी बन जाते हैं। मासिक शिवरात्रि का व्रत से संतान प्राप्ति, रोगों से मुक्ति के लिए भी किया जाता है।

आपको बता दें, वर्ष 2022 का पहला मासिक शिवरात्रि (masik shivratri) 1 जनवरी, 2022 को पड़ रहा है। इस बार मासिक शिवरात्रि के दिन भगवान शिव की पूजा का विशेष संयोग बन रहा है। मान्यता है कि इस दिन शिवजी का पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती है। 

तो आइए देवदर्शन के इस ब्लॉग में 1 जनवरी 2022 को पड़ने वाले मासिक शिवरात्रि की पूजा विधि और इसके महत्व को विस्तार से जानें।

मासिक शिवरात्रि 2022 का शुभ मूहुर्त

वर्ष 2022 का पहला मासिक शिवरात्रि पौष मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 1 जनवरी 2022 को पड़ रहा है। इस दिन अंग्रेजी महीना का नववर्ष भी है। इस दिन शुभ मुहूर्त सुबह एक बजकर 31 मिनट से लेकर मध्याह्न 12 बजकर 55 मिनट तक है।

मासिक शिवरात्रि का महत्व (masik shivratri ka mahatva)

मासिक शिवरात्रि का व्रत बहुत आसान और प्रभावशाली होता है। इस व्रत का उल्लेख सभी प्रमुख हिंदू पुराणों में मिलता है। स्कंध पुराण में विशेष रूप से शिवरात्रि व्रत का वर्णन है। मासिक शिवरात्रि का व्रत रखने और पूजा करने वाले लोगों की सभी समस्याएं दूर होती हैं। 

मान्यता है कि मासिक शिवरात्रि का व्रत करने से मनोवांछित वर की प्राप्ति होती है। इस व्रत को करने से विवाह में आ रही रुकावटें दूर होती हैं। इस दिन रुद्राभिषेक का विशेष महत्व है। इस दिन रुद्राभिषेक किया जाए तो बहुत लाभकारी होता है। इस दिन पूजा के बाद शिव मंत्रों का जाप भी अवश्य करना चाहिए। मासिक शिवरात्रि के दिन शिव चालीसा का भी बहुत महत्व होता है। शिव चालीसा का पाठ करने से सभी प्रकार की अड़चनें दूर होती है। 

मासिक शिवरात्रि की पूजा विधि (masik shivratri puja vidhi)

  • इस दिन सुबह उठकर स्नान करें, स्नान करने के बाद पीले या सफेद रंग के साफ वस्त्र धारण करें।
  • पूजा वाली जगह पर भगवान शिव, माता पार्वती, गणेश जी, कार्तिकेय जी और भगवान शिव के वाहन नंदी की प्रतिमा स्थापित करें 
  • इससे बाद भगवान शिव, माता पार्वती, गणेश जी, कार्तिकेय जी की पूजा और व्रत का संकल्प लें। 
  • भोलेनाथ के आगे दीप जलाकर शिवलिंग पर दूध, गंगाजल, बेलपत्र, धतूरा आदि अर्पित करें।
  • इसके बाद 108 बार शिव मंत्रों का जाप करें, शिव चालीसा का पाठ और आरती अवश्य करें।

यदि आप अन्य व्रत-त्योहार, पूजा-पाठ और मंदिरों के बारे में अधिक जानना चाहते हैं तो देवदर्शन ऐप ज़रूर डाउनलोड करें। साथ ही इस ब्लॉग को शेयर करना न भूलें।

ये भी पढ़ें-

Author

Write A Comment