हिन्दू धर्म में जितना महत्व पूर्णिमा का है, उतना ही महत्व अमावस्या (amavasya) का भी होता है। इस दिन स्नान-दान का विशेष महत्व है। हिंदू पंचांग के मुताबिक अमावस्या हर साल कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि के दिन मनाई जाती है। साल 2022 की पहली अमावस्या 2 जनवरी दिन रविवार को पड़ रही है। पौष माह में होने वाले इस अमावस्या का विशेष महत्व है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पौष अमावस्या को बहुत ही शुभ माना जाता है। इस दिन हिंदू धर्म में कई शुभ कार्य किए जाते है। यह भी कहा जाता है, कि इस दिन किसी भी शुभ कार्य को शुरू करने से सफलता जरूर मिलती है।

आपको बता दें कि अमावस्या के दिन लोग अपने पितरों की शांति के लिए पूजा-पाठ, तर्पण और श्राद्ध करते हैं। कहते है कि इस दिन तंत्र साधना, धार्मिक कार्य और मंत्र जाप करना बेहद शुभ होता है। साथ ही कुछ लोग पितृ दोष और कालसर्प दोष से मुक्ति पाने के लिए पौष अमावस्या (paush amavasya) के इन व्रत भी रखते हैं, जिससे उनके जीवन में सुख-शांति बनी रहे। इसके अलावा पौष अमावस्या के दिन दान-स्नान का भी विशेष महत्व होता है। माना जाता है कि ऐसा करने से लोगों को पुण्य की प्राप्ति होती है।

पौष अमावस्या 2022 की तिथि और शुभ मुहूर्त (paush amavasya 2022 ki tithi aur shubh muhurat)

पौष अमावस्या 2 जनवरी 2022 (paush amavasya 2nd january 2022), रविवार के दिन दोपहर 3 बजकर 44 मिनट से शुभ मुहूर्त शुरू होकर अगले दिन यानी 3 जनवरी 2022 की सुबह 5 बजकर 26 मिनट तक  पौष अमावस्या का शुभ समय रहेगा।

पौष अमावस्या 2022 की पूजा विधि

  • पौष अमावस्या के दिन सुबह सबसे पहले उठकर घर और अपने मंदिर की साफ-सफाई करें।
  • इसके बाद नदी या किसी भी शुद्ध जल में स्नान जरूर करें।
  • फिर तांबे के पात्र में शुद्ध जल से भगवान सूर्य को अर्घ्य दें।
  • मान्यताओं के अनुसार पात्र में अगर आप पुष्य और चंदन डालें तो शुभ होता है।  
  • इसके बाद आपको अपने पितरों के नाम का तर्पण दें।
  • पौष अमावस्या के दिन अपने पितरों के नाम से तिल जल से पितरों की पूजा-अर्चना करें।
  • इस दिन पीपल के पेड़ की पूजा करें और पेड़ की परिक्रमा करें।
  • अपनी इच्छा अनुसार गरीब और जरूरतमंदों को दान दें।
  • सुबह की पूजा के बाद गाय को रोटी जरूर खिलाएं।
  • इस दिन हनुमान चालीसा या सुंदरकांड का पाठ करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है।

पौष अमावस्या का महत्व

मान्यता है कि इस दिन पितरों की विधि-विधान के साथ पूजा करने से रुके हुए कार्य में सफलता और नौकरी पैसे में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं। इसके अलावा इस दिन संतान के प्रति होने वाली बाधाएं भी समाप्त होती हैं।

ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक, पौष अमावस्या के दिन सूर्य देव और चंद्रमा एक ही राशि में विराजमान होते हैं। अमावस्या तिथि के दिन चंद्रमा दिखाई नहीं देता है और उसके होने वाले प्रभाव की ऊर्जा बहुत कम हो जाती है। अगर इस समय कोई भी जातक जन्म लेता हैं, तो उसकी कुंडली में चंद्र दोष होता है, जिसके कारण से उस व्यक्ति पर चंद्रमा का प्रभाव नहीं रहता है। 

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